बांगरमऊ। उन्नाव देश में चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर एक बार फिर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर मतपत्रों के माध्यम से मतदान कराए जाने की मांग चर्चा में है। विभिन्न विपक्षी राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा समय-समय पर ईवीएम से मतदान कराए जाने की व्यवस्था पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इसी क्रम में आगामी चुनावों को मतपत्रों के माध्यम से संपन्न कराए जाने की मांग जोर पकड़ रही है। मांग उठाने वालों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता का विश्वास सर्वोपरि है और चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए, जिस पर प्रत्येक राजनीतिक दल तथा आम नागरिक को भरोसा हो।
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां चुनाव केवल सरकार चुनने का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की इच्छा और लोकतांत्रिक अधिकारों की अभिव्यक्ति भी हैं। ऐसे में चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखना चुनाव आयोग, राजनीतिक दलों और संबंधित संस्थाओं की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। चुनाव के दौरान मतदान की व्यवस्था से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित किए जाने तक प्रत्येक चरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक माना जाता है।देश में लंबे समय से ईवीएम के माध्यम से चुनाव कराए जा रहे हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, ईवीएम के उपयोग से मतदान और मतगणना की प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने में सहायता मिलती है। हालांकि, विभिन्न विपक्षी दलों के नेताओं ने मशीनों की विश्वसनीयता, उनकी जांच और चुनावी प्रक्रिया में पर्याप्त पारदर्शिता सुनिश्चित किए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। इन सवालों के बीच मतपत्रों से मतदान कराए जाने की मांग भी सामने आती रही है। मांग करने वाले पक्ष का तर्क है कि कागजी मतपत्रों के माध्यम से मतदान होने पर मतदाता अपने मत को प्रत्यक्ष रूप से कागज पर अंकित कर सकता है और मतगणना के दौरान मतपत्रों की गिनती के आधार पर परिणाम घोषित किए जा सकते हैं।
लोकतंत्र में चुनाव की सफलता केवल मतदान प्रतिशत या परिणाम घोषित होने तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण है कि मतदाता चुनाव प्रक्रिया को कितना विश्वसनीय मानते हैं। यदि किसी राजनीतिक दल या नागरिक को चुनाव व्यवस्था के संबंध में कोई संदेह है, तो उसके समाधान के लिए स्पष्ट प्रक्रिया, प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था और तथ्यों पर आधारित संवाद आवश्यक है। मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग करने वालों का कहना है कि आगामी चुनावों में ऐसी व्यवस्था अपनाई जानी चाहिए, जिससे मतदान और मतगणना को लेकर किसी प्रकार की आशंका न रहे। उनके अनुसार, चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने तथा मतदाताओं का भरोसा मजबूत करने के लिए सभी संभावित विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।मतपत्रों से मतदान कराने के समर्थकों का कहना है कि आगामी चुनावों में पुरानी कागजी मतदान व्यवस्था को दोबारा लागू करने की संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे मतगणना की प्रक्रिया को कागजी रिकॉर्ड के आधार पर देखा जा सकेगा और चुनाव परिणामों को लेकर उठने वाली आशंकाओं का समाधान करने में मदद मिल सकती है। आगामी चुनावों को लेकर उठ रही इस मांग के बीच चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। आयोग से अपेक्षा की जाती है कि वह मतदान प्रक्रिया, ईवीएम की सुरक्षा, मतगणना, उपलब्ध सत्यापन व्यवस्था और शिकायतों के निस्तारण के संबंध में जनता को स्पष्ट एवं तथ्यपरक जानकारी उपलब्ध कराए। साथ ही, राजनीतिक दलों को भी चाहिए कि वे चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उचित मंच पर तथ्यों और साक्ष्यों के साथ उठाएं। इससे चुनाव व्यवस्था को लेकर स्वस्थ लोकतांत्रिक संवाद को बढ़ावा मिल सकता है।
आगामी चुनाव मतपत्रों के माध्यम से कराए जाने की मांग तेज
